राजू ने चाय पकोड़ा बेचा और आगे कैसे बढ़ा देखिए
आप अपने जीवन मे छोटा-सा काम करके सफ़लता कैसे प्राप्त करें।
जी हाँ दोस्तो नमस्कर,मैं सत्य कथा पर आधारित एक कहानी अपने ब्लोग के माध्यम से शेयर कर रहा हूँ। मुझे उम्मीद है कि आप लोग इस कहानी को जरूर पसन्द करेंगे।
कुछ समय पहले की बात है दो मित्र थे।
एक का नाम अनिल वर्मा दूसरे का नाम राजू था।
दोनों एक ही स्कूल मे पढ़ते थे।
वे अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अलग -अलग काम की तलाश मे निकल पड़े।
कुछ समय के बाद एक मित्र ने बैक के बाहर चाय की दुकान खोल दी। दुकान का नाम रख दिया।
" राजू चाय पकोडा "
कुछ समय के बाद उसका मित्र भी बैक मैनेजर बनकर उसी बैक मे आ गया।
उसी दिन मैनेजर अपना काम खत्म करके अपने घर के लिए निकल रहा था कि अचानक उसकी नजर राजू पर पड़ी, राजू के हाथ में एक चाय की कैतली थी।
जिसमें वह चाय लेकर जा रहा था। उसे देखकर अनिल ने पूछा अरे, राजू आजकल तुम क्या कर रहे हो?
राजू बोला साहब मैं तो बैक के बाहर चाय पकोडा बेचता हूँ।
तो क्या तुम्हें कोई नोकरी नहीं मिली।
राजू बोला साहब क्या करें? कोई रोजगार नहीं था। तो मैने चाय पकोडे की दुकान खोल दी।
राजू तुम एक दिन में कितना कमा लेते हो? साहब बस यहीं 100 दो सौ रुपये।
साहब बैक मे आपको कितना मिलता है? राजू ने पूछा,
अनिल बोला- लगभग 28000 रुपये महिना मिलते हैं।
एक साल के बाद अनिल, राजू के पास गया और बोला आज स्पेशल चाय बनाकर पिला।
राजू बोला, साहब आज आप बड़े खुश नजर आ रहे हो। हां भाई खुशी की तो बात ही है। मेरी पगार बढ़ गयी है।
अनिल बोला राजू तेरा काम कैसा चल रहा है? राजू बोला साहब अच्छा चल रहा है। अब एक दिन के 10बारह हजार तो कहीं नहीं गये।
15 वर्ष के बाद राजू भाई पकोडे बेच बेचकर चाय की दुकान से लेकर देश के सबसे बड़े पद तक पहुंच जाते हैं।
लेकिन चाय पकोडा के आदी आज भी हैं। कभी-कभी जुबान पर चाय पकोडा आ ही जाता है।
क्या करे आदत जो पड़ गई। छुटने का नाम ही नहीं ले रही है।
अब मुझे ज्यादा कुछ कहने की आवश्यकता तो नहीं है।
आप खुद ही इतने समझदार कि राजू चाय वाला कौन है?

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